कुछ लोगों के स्वभाव में जीवन के आरम्भ से ही बड़प्पन या जिम्मेदारी का भाव होता है | ये लोग निस्वार्थ भाव से स्वतः ही आगे बढ़कर जिम्मेदारी लेकर सामाजिक और व्यावहारिक कर्तव्यों का पालन करते हैं | ऐसा उनके अनुरक्त ग्रह सूर्य के कारण हो सकता है |
यदि किसी व्यक्ति का जन्म पुनर्वसु, विशाखा या पूर्व भाद्रपद नक्षत्र में जन्म हुआ है उनका अनुरक्त ग्रह सूर्य बनता है| ऐसे व्यक्ति अपने पूर्व जन्म में अपने सांसारिक दायित्व का पालन भी कर रहे थे और आध्यात्मिक जगत में भी काम कर रहे थे | पर ये अपने ऋणानुबन्धनों को समाप्त करने से चूक गए | कारण कुछ भी हो सकता है साधन कम पड़ गया हो या समय कम पड़ गया हो | और पिछले जन्म में देह त्याग करते वक़्त उनकी अनुरक्ति इस दिशा में रह गयी थी अब वे इस जन्म में इस दिशा में पुनः आगे बढ़कर अपने पुराने ऋणानुबन्धनों को समाप्त करना चाहते हैं |
ये लोग इस जीवन में सरकार और समाज में विशेष सम्मान प्राप्त करते हैं, ये लोग पिछले कई जन्मों से इस मार्ग पर चल रहे थे और इन लोगों ने पूर्व जन्म में काफी हद तक ज्ञान प्राप्त कर लिया था | ये लोग इस दिशा में काम करते हुए थोड़ी सी मेहनत करके परमधाम की ओर जा सकते हैं |
यद्यपि विभिन्न भावों में सूर्य कि स्थिति के अनुसार कुछ अन्य फल भी जुड़ जाएंगे जिनके विषय में आगे चर्चा कि जायेगी|